ज्वर (बुखार) febrile fever
ज्वर बुखार Febrile Fever आयुर्वेद शास्त्र में ज्वर को सब रोगों का राजा कहा गया है । यह जन्म से लेकर मृत्यु प्रयत्न सभी प्राणियों के शरीर में निवास करता है । जब सभी इसका वेग बढ़ जाता है । तब प्राणी को विभिन्न प्रकार के कष्टों का सामना करना पड़ता है । हरित संहिता में लिखा है कि ज्वर के बिना प्राणी की मृत्यु नहीं होती अर्थात मृत्यु के समय शरीर में ज्वार का कुछ ना कुछ अंश अवश्य रहता है । ज्वर अनेक प्रकार के रोगों को जन्म देता है । ज्वर की उत्पत्ति पित्त के प्रकोप के से मानी गई है ज्वर के अनेक भेद हैं । तवर की चिकित्सा करते समय उन भेदों का सावधानीपूर्वक विचार कर लेना आवश्यक है । सामान्य ज्वर सामान्य लक्षण - शरीर के तापमान का बढ़ जाना एवं संपूर्ण शरीर में अकड़न अथवा दर्द होना यह ज्वर के सामान्य लक्षण है सामान्य ज्वर में शरीर का तापमान 102 डिग्री के आसपास रहता है इससे अधिक तापमान होने पर तीर व ज्वर समझा जाना चाहिए शरीर के तापमान को थर्मामीटर द्वारा नापा जाता है । ज्वर सरीरिक तथा मानसिक ...